अफीम की खेती मामले में बड़ा अपडेट: विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से नियमित जमानत, बचाव पक्ष की दलीलों पर मिली राहत

दुर्ग। पुलगांव थाना क्षेत्र में सामने आए बहुचर्चित अफीम की खेती मामले में आरोपी विनायक ताम्रकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले में उन्हें नियमित जमानत प्रदान कर दी है। जमानत याचिका की ओर से अधिवक्ता गौतम क्षेत्रपाल एवं अमन ताम्रकार ने पैरवी की।

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि अभियोजन के पास ऐसा कोई प्रत्यक्ष अथवा स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है, जिससे विनायक ताम्रकार की कथित अफीम की खेती में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित हो सके। बचाव पक्ष के अनुसार, जिस भूमि पर कथित रूप से अफीम की खेती का मामला सामने आया, वह विनायक ताम्रकार के नाम पर दर्ज नहीं थी और उनके कब्जे से भी किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ।
पानी-बिजली और सिंचाई उपकरणों के आधार पर जोड़ने का आरोप
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि पानी, बिजली, पंप, स्प्रिंकलर सहित अन्य व्यवस्थाओं के आधार पर विनायक ताम्रकार को अन्य आरोपियों से जोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई।
बचाव पक्ष की ओर से यह आरोप भी रखा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों के विपरीत उन्हें प्रकरण में दुर्भावनापूर्ण तरीके से शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को माना महत्वपूर्ण
मामले के उपलब्ध अभिलेखों, परिस्थितियों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने यह तथ्य भी ध्यान में रखा कि आवेदक घटना स्थल पर उपस्थित नहीं था। साथ ही उसके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। वहीं, प्रकरण में शामिल सह-आरोपियों को भी पूर्व में जमानत मिल चुकी है।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने विनायक ताम्रकार को नियमित जमानत देने का आदेश पारित किया।
बहुचर्चित मामले में कानूनी मोर्चे पर अहम मोड़
पुलगांव थाना क्षेत्र से जुड़े इस कथित अफीम खेती प्रकरण ने पहले काफी चर्चा बटोरी थी। अब हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद मामले ने एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से बरी होना नहीं है और प्रकरण में आरोपों का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों एवं सुनवाई के आधार पर होगा।

