BemetaraChhattisgarhDurgLatest NewsPoliticsRaipur

500 करोड़ का नुकसान : प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के फैसले से सप्लाई चेन ध्वस्त

बिना तैयारी के आबकारी विभाग द्वारा प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के निर्णय से प्रदेश के सभी जिलों में शराब की सप्लाई चेन बाधित हो गई है।

Advertisement

बीते 15 दिनों में विभाग को देसी और अंग्रेजी की चीप रेंज (किफायती श्रेणी) की शराब से करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। किसी भी जिले में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके चलते अंग्रेजी की महंगी शराब और बीयर की मांग में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रदेश की डिस्टिलरियों से बिलासपुर समेत प्रदेश भर की करीब 800 दुकानों में शराब की सप्लाई होती है। 1 अप्रैल से पीईटी यानी पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग का आदेश आने के बाद डिस्टिलर्स और बॉटलर्स में खलबली मच गई।

कांच की बोतलों में बॉटलिंग करने वाले कुछ पक्ष कोर्ट चले गए, वहीं अचानक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया। इसके बाद आनन-फानन में विभाग को 31 मई तक फिर से कांच की बोतलों में बॉटलिंग का आदेश जारी करना पड़ा।

इस प्रक्रिया में डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन और बॉटलिंग का काम ठप रहा। इस दौरान दुकानों में मौजूद पुराना स्टॉक बिक गया। 10 अप्रैल से उत्पादन तो शुरू हुआ, लेकिन वह वर्तमान मांग की तुलना में अपर्याप्त है। दुकानों को खपत की केवल एक-तिहाई शराब मिल पा रही है, जो शुरुआती कुछ घंटों में ही खत्म हो जाती है।

चार महीने पहले कैबिनेट की मंजूरी प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के निर्णय को चार महीने पहले ही कैबिनेट से मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, पिछली सरकार के दौरान डिस्टिलर्स और बॉटलर्स के विरोध के बाद यह निर्णय वापस लेना पड़ा था। इसके अलावा, पीईटी प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने जैसी अफवाहें भी फैलाई गईं। विभाग ने सीधे 1 अप्रैल को आदेश जारी कर दिया।

रोज 70 करोड़ की देसी व किफायती अंग्रेजी शराब की खपत प्रदेश की 800 से ज्यादा दुकानों में रोजाना लगभग 45 करोड़ की देसी और 25 करोड़ रुपए की किफायती श्रेणी की अंग्रेजी शराब बेची जाती है। वर्तमान में सप्लाई कम होने से शासन को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। यह नुकसान ऐसे पीक टाइम पर हो रहा है जब शादियों के सीजन के कारण मांग सबसे ज्यादा रहती है।

अकेले बिलासपुर में साढ़े 4 हजार पेटी की मांग: बिलासपुर की 42 देसी शराब दुकानों में रोजाना साढ़े 4 हजार पेटी देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की मांग है। पर केवल एक डेढ़ हजार पेटी मिल पा रही है। यही कारण है कि शाम ढलते ही स्टॉक खत्म होने पर दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं। देसी शराब के काउंटर खाली होने से अंग्रेजी शराब के काउंटरों पर भीड़ बढ़ रही है, जिससे सेल्समैन भी परेशान हैं।

रॉ-मटेरियल के दाम 40 से 70% तक बढ़े: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्लास्टिक निर्माण के कच्चे माल (रॉ-मटेरियल) की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। पॉलीमर की कीमतों में 40% से 60% और नैफ्था की कीमतों में महज दो हफ्तों के भीतर लगभग 70% का रिकॉर्ड उछाल आया है। पीवीसी और पॉलीथीन जैसी प्रमुख श्रेणियों के प्लास्टिक रॉ-मटेरियल में भी 30% से 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्लास्टिक बोतल उद्योगों में सेटअप तैयार नहीं: एक अधिकारी के अनुसार शराब की बॉटलिंग के लिए भारी मात्रा में प्लास्टिक बोतलों की आपूर्ति फिलहाल अन्य उद्योगों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में डिस्टिलर्स और बॉटलर्स खुद प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रत्येक बॉटलर 7 से 8 करोड़ का सेटअप तैयार कर रहा है, जिसमें समय लग रहा है। अनुमान है कि व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होने में समय लगेगा।

जल्द ही कर ली जाएगी भरपाई:

चार महीने पहले कैबिनेट में इसकी मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इसे अप्रैल से लागू किया गया है। नई व्यवस्था के कारण शुरुआती दौर में थोड़ा नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन जल्द ही इसकी भरपाई कर ली जाएगी। इस नई व्यवस्था से शराब में मिलावटखोरी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। लखन लाल देवांगन, वाणिज्य, उद्योग एवं आबकारी मंत्री

Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button