
दुर्ग/ जिले के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले कलेक्ट्रेट परिसर में हुई चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। देर रात अज्ञात बदमाशों ने कलेक्टर परिसर स्थित लोक सेवा केंद्र को निशाना बनाते हुए वहां रखी नगदी पर हाथ साफ कर दिया। इतना ही नहीं, चोरों ने पेंशन शाखा में भी घुसने का प्रयास किया जिससे प्रशासनिक महकमें में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, बदमाश देर रात लोक सेवा केंद्र पहुंचे और सबसे पहले ताला तोड़ने की कोशिश की। जब इसमें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने दरवाजे की कुंडी उखाड़ कर अंदर प्रवेश किया। केंद्र के भीतर रखे गल्ले से करीब 6 से 7000 रुपए नगद चोरी कर लिए गए। सुबह कर्मचारियों के पहुंचने पर घटना का खुलासा हूवा।
चोरी के बाद बदमाशों ने पेंशन शाखा की ओर भी रुक किया। बताया जा रहा हैं कि वे ज्वाइंट डायरेक्टर के कक्ष तक पहुंच गए और वहां पैसों की तलाश में समान खंगाल डाला। हालांकि प्रारंभिक जांच में किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज या अन्य सामग्री की चोरी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कार्यालय का सामान अस्त – व्यस्त मिला।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और परिसर सहित आसपास लगे सीसीटीवी कैमरा की फुटेज खंगाली जा रही है। प्रथम दृष्टियां आशंका जताई जा रही है कि आरोपी नगदी चोरी के इरादे से ही परिसर में दाखिल हुए थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल – इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कलेक्टर परिसर जैसे अति सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक केंद्र में चोर आसानी से घुसकर वारदात को अंजाम दे सकते हैं, तो आम सरकारी कार्यालयो और नागरिकों की सुरक्षा कितनी सुरक्षित है?
रात के समय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, गश्त व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में और बड़ी घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल पुलिस अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच जारी है। वही इस घटना ने कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
