
शिकायत के बाद भी कार्यवाही का इंतजार, ग्रामीणों का आरोप – “धमकी और दबाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा”
धमधा। धमधा विकासखंड के ग्राम धर्मपुरा में शासकीय भूमि पर गठित अवैध अतिक्रमण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है की मुख्य मार्ग से लगी करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया गया है जबकि शिकायतों के बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही सामने नहीं आई हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव की बहुमूल्य शासकीय भूमि पर शत्रुघन यादव द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण किया गया है। मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि जब भी किसी व्यक्ति ने इस विषय में सवाल उठाने या शिकायत करने की कोशिश की तो उसे पुलिस विभाग में पदस्य उनके पुत्र के प्रभाव का हवाला देकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
भय के माहौल में जी रहे ग्रामीण – गांव के कई लोगों का दावा है कि वह खुलकर अपनी बात रखने से डर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने वालों को झूठे मामलों में फसाने और पुलिसिया कार्रवाई का भय दिखाया जाता है। इसी वजह से अधिकांश लोग कैमरे या सार्वजनिक मंच पर सामने आने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल भूमि अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के समान अनुपालन पर भी सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि यदि किसी आम व्यक्ति द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा किया जाता तो तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन प्रभावशाली लोगों के मामलों में जांच और कार्रवाई की रफ्तार धीमी दिखाई देती है।
एसडीएम कार्यालय तक पहुंची शिकायत – सूत्रों के मुताबिक पूरे मामले की शिकायत धमधा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष की जा चुकी है। शिकायत के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी की राजस्व विभाग मौके पर पहुंचकर भूमि का सीमांकन करेगा और तथ्य सामने लाएगा, लेकिन अब तक किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।
इसी बीच ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखो और जमीन की वास्तविक स्थिति की गंभीरता से जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें – धरमपूरा का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गलत संदेश जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या करोडो रूपए मूल्य की बताई जा रही शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाएगा? या फिर यह मामला भी शिकायत तो और जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है और वे निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर उचित कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
