
धमधा, 21 जुलाई| सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। साजा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ईश्वर साहू के खिलाफ फेसबुक पर कथित रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी धमधा मंडल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को भाजपा धमधा मंडल अध्यक्ष लोकेंद्र ब्रह्मभट के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धमधा थाना पहुंचकर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्यवाही करने की मांग की।
भाजपा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर संचालित BMT TIMES नामक पेज की एक वीडियो पोस्ट पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष राजीव गुप्ता द्वारा कथित रूप से विधायक ईश्वर साहू के लिए अपमानजनक एवं अभद्र शब्दों का प्रयोग किया गया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सार्वजनिक मंच पर की गई इस प्रकार की टिप्पणी न केवल एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि इससे आम नागरिक को और भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाएं भी आहत हुई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन इसका उपयोग मर्यादित एवं जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उसका व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष लोकेंद्र ब्रह्मभट ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का प्रयोग समाज में गलत संदेश देता है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी व्यक्ति, विशेषकर जनप्रतिनिधि के प्रति असोभनीय और अपमानजनक भाषा का प्रयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर माना जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रचलित कानून के तहत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
ज्ञापन में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि यदि इस प्रकार की टिप्पणियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर लगातार इस तरह की भाषा का उपयोग होने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और विभिन्न वर्गों के बीच अनावश्यक विवाद पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।
भाजपा जनप्रतिनिधि मंडल ने पुलिस को यह भी जानकारी दी कि संबंधित फेसबुक पोस्ट और उस पर की गई कथित टिप्पणी के स्क्रीनशॉट एवं अन्य डिजिटल साक्ष उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जांच में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। पार्टी ने मांग की है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तकनीकी जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा वास्तव में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता के साथ ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई टिप्पणी भी कानूनी जांच के दायरे में आती है और यदि किसी टिप्पणी से मानहानि, सामाजिक वैमनस्य या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष के आधार पर ही लिया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद और आलोचना स्वाभाविक हैं, लेकिन आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। सोशल मीडिया पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के कारण कई बार भाषा की मर्यादा टूट जाती है, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संयम बनाए रखने और कानून पर भरोसा रखने की आवश्यकता होती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई चाहते हैं, जबकि दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है की जांच के बाद पुलिस किन धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई करेगी।
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार की टिप्पणियां या पोस्ट का कानूनी मूल्यांकन उसके संदर्भ, भाषा, उद्देश्य और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यो के आधार पर किया जाता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही से पहले पुलिस तकनीकी और तथ्यात्मक जांच करती है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता।
भाजपा मंडल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी जनप्रतिनिधि या अन्य नागरिकों के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने से बचे। पार्टी का कहना है कि कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए और डिजिटल माध्यमों पर भी मर्यादा एवं जिम्मेदारी बनाए रखना सभी नागरिकों का दायित्व है।
फिलहाल यह मामला पूरी जांच के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा की कथित टिप्पणी की प्रकृति क्या थी, उपलब्ध साक्ष्य क्या कहते हैं और कानून के अनुसार आगे किस प्रकार की कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब राजनीतिक दलों, स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की नजर बनी हुई है।

