स्कूली बच्चों से भरी स्कॉर्पियो यात्री प्रतीक्षालय में घुसी, बड़ा हादसा टला; चालक पर नशे में होने का आरोप


धमधा। स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय धमधा में शुक्रवार शाम छुट्टी के बाद स्कूली बच्चों को घर छोड़ने जा रही एक स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर परसबोड़ चौक स्थित यात्री प्रतीक्षालय में जा घुसी। हादसे के वक्त वाहन में करीब 15 से 16 स्कूली बच्चे सवार बताए जा रहे हैं। गनीमत रही कि दुर्घटना में किसी बच्चे के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल की छुट्टी करीब शाम 4:05 बजे हुई थी। इसके बाद दूर-दराज के गांवों से आने वाले बच्चे रोज की तरह पालकों द्वारा निजी तौर पर बुक की गई गाड़ियों से अपने घरों के लिए रवाना हुए। इसी दौरान सीजी 04 एचबी 7637 नंबर की स्कॉर्पियो बच्चों को उनके घर छोड़ने जा रही थी।
बताया जा रहा है कि धमधा-खैरागढ़ मुख्य मार्ग पर परसबोड़ चौक के पास अचानक स्कॉर्पियो अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे बने यात्री प्रतीक्षालय में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्रतीक्षालय का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
चालक पर नशे में वाहन चलाने का आरोप

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और कुछ परिजनों ने वाहन चालक पर कथित तौर पर नशे की हालत में वाहन चलाने का आरोप लगाया है। चालक की पहचान शांतनु यादव, निवासी धरमपुरा के रूप में बताई जा रही है। हादसे के बाद चालक द्वारा वाहन छोड़कर मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि चालक के संबंध में इस तरह की शिकायत पहले भी सामने आ चुकी है। हालांकि, चालक के नशे में होने और पूर्व की घटना से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने का सवाल
इस घटना ने स्कूली बच्चों को निजी वाहनों से लाने-ले जाने की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पालकों द्वारा महीने के हिसाब से निजी वाहन बुक किए जाते हैं, जिनसे बच्चों को प्रतिदिन स्कूल से घर और घर से स्कूल लाया-ले जाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर परिवहन किया जाता है। ऐसे में यदि वाहन चालक तेज गति या लापरवाही से वाहन चलाए तो छोटी सी गलती भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
इस घटना में भी बच्चों से भरी गाड़ी का यात्री प्रतीक्षालय से टकराना किसी बड़े हादसे की चेतावनी से कम नहीं है। गनीमत रही कि इस बार किसी बच्चे की जान नहीं गई।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले निजी वाहनों की फिटनेस, परमिट, क्षमता, चालक की स्थिति और यातायात नियमों के पालन की जांच आखिर कितनी गंभीरता से हो रही है।
यदि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे थे या चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था, तो यह बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
बड़ा हादसा टलने के बाद अब देखना होगा कि धमधा प्रशासन और यातायात विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या स्कूल आने-जाने वाले निजी वाहनों की जांच के लिए कोई विशेष अभियान चलाया जाता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक दुर्घटना का नहीं, बल्कि हर दिन इन वाहनों में सफर करने वाले सैकड़ों स्कूली बच्चों की सुरक्षा का है।


