रामकथा केवल संघर्ष नहीं, जीवन जीने की कला सिखाने वाला ग्रंथ: पं. युवराज पांडेय

बोरिंगारका में सप्तदिवसीय श्रीराम कथा का दूसरा दिन — सती मोह, दक्ष यज्ञ विध्वंस और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने बांधा समां
दुर्ग। ग्राम बोरिंगारका (उतई) में धर्म ज्योति सनातन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय भव्य श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राष्ट्रीय कथावाचक एवं छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र आचार्य पं. श्री युवराज पांडेय ने व्यासपीठ से श्रीरामचरितमानस की महिमा के साथ शिव-सती चरित्र का भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्तिरस में डूबा रहा और जय सियाराम तथा हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा।
मानस जीवन प्रबंधन का अनुपम मार्गदर्शक
कथा व्यास पं. युवराज पांडेय ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल राम-रावण युद्ध की कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कार, कर्तव्य और मर्यादा का मार्ग दिखाने वाला अनुपम ग्रंथ है। मानस के प्रत्येक दोहे और चौपाई में जीवन को सही दिशा देने का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि माता-पिता, भाई, गुरु, परिवार और समाज के प्रति मनुष्य के क्या कर्तव्य होने चाहिए, इसकी सीख रामचरितमानस से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के संचालन में धर्म एवं नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। साथ ही अंधविश्वास से दूर रहकर सत्कर्म करने और अपने कर्मपथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ने का संदेश दिया।
सती मोह से शिव-पार्वती विवाह तक सुनाया प्रसंग
कथा के दौरान भारद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद के साथ भगवान शिव और माता सती के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य पं. पांडेय ने बताया कि माता सती द्वारा प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेने के प्रसंग के बाद भगवान शिव ने उन्हें माता सीता के स्वरूप में देखा और मानसिक रूप से उनका त्याग कर अखंड समाधि धारण की।
इसके बाद दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से व्यथित माता सती ने योगाग्नि में अपना देह त्याग दिया। इस घटना के पश्चात भगवान शिव के गण वीरभद्र द्वारा दक्ष यज्ञ का विध्वंस किए जाने का प्रसंग भी श्रद्धालुओं को सुनाया गया।
कथा के अगले चरण में माता सती के पार्वती रूप में पुनर्जन्म, उनकी कठोर तपस्या और अंततः भगवान शिव के साथ उनके पावन विवाह का मनोहारी वर्णन किया गया। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कथा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय सियाराम’ के जयघोष से गूंज उठा।
गणमान्य अतिथियों ने लिया कथा का आशीर्वाद
कथा के दौरान अनेक गणमान्य अतिथियों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया। इनमें छत्तीसगढ़ जोहार पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव, डोंगरगढ़ के पूर्व विधायक भुवनेश्वर बघेल, खैरागढ़ राजघराने की राजकुमारी शताक्षी सिंह, मनीष बछोर, नगर पंचायत उतई की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती साहू सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, पंच-सरपंच एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
महाआरती के साथ हुआ समापन
कथा के समापन अवसर पर विधिवत महाआरती की गई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन समिति ने बताया कि श्रीराम कथा का आयोजन आगामी दिनों में भी प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से अनवरत जारी रहेगा। समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।




