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अभाविप का आरोप: समस्याओं का ज्ञापन देखते ही सीएचओ अस्पताल छोड़कर निकले, एक सप्ताह में उग्र आंदोलन की चेतावनी

देवकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बादहाल व्यवस्थाओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने खोला मोर्चा, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए गंभीर सवाल

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देवकर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवकर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में व्याप्त विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन अभावीप का आरोप है की ज्ञापन की जानकारी मिलते ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ अस्पताल परिसर से निकल गए।

अभाविप कार्यकर्ताओं के अनुसार, जब वे अपनी मांगों और शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंचे तो सीएचओ ने ज्ञापन देखने के बाद उनसे चर्चा करने के बजाय तत्काल अस्पताल छोड़ दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने मौजूद लैब टेक्नीशियन से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि उन्होंने भी शिकायतें सुनने के बाद प्रस्तुति वार्ड में जाकर स्वयं को अलगकर लिया।

परिषद ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि लैब जांच के नाम पर मरीजों से राशि की मांग की जाती है, लेकिन उनकी रसीद नहीं दी जाती। साथ ही रिपोर्ट की गुणवत्ता और कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए गए हैं। अस्पताल परिसर में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने, प्रसाधन कक्षों की खराब सफाई, चिकित्सा उपकरणों की कमी तथा उपकरणों के उचित रखरखाव का अभाव भी प्रमुख शिकायतों में शामिल है।

अभाविप ने यह भी आरोप लगाया है की अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को बिना समुचित उपचार के रेफर कर दिया जाता है। प्रसव कक्ष की व्यवस्थाओं, प्राथमिक उपचार सेवाओं और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ी किए गए हैं। परिषद ने अस्पताल में पदस्थ एक कर्मचारी की जिम्मेदारियां और कार्यों को लेकर भी स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा है।

अभाविप का कहना है कि शासकीय अस्पताल देवकर की दुर्दशा लंबे समय से बनी हुई है और मरीजों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो अस्पताल परिसर में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अधिकारी पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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