‘कलम के नांगर’ में सहेजी गई छत्तीसगढ़ी साहित्य की विरासत, धमधा के लिए गौरव का क्षण

धमधा। छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंस्कृति और माटी की संवेदनाओं को शब्दों में पिरोने वाले स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी की साहित्यिक विरासत अब पुस्तक के रूप में आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रही है। उनकी छत्तीसगढ़ी भाषा में रचित 88 कविताओं के संग्रह ‘कलम के नांगर’ का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा किया गया है। यह प्रकाशन न केवल साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि धमधा नगर के लिए भी गौरव का विषय है, क्योंकि स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी धमधा नगर के निवासी रहे हैं।


‘कलम के नांगर’ नाम अपने आप में छत्तीसगढ़ की मिट्टी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव दर्शाता है। संग्रह की कविताओं में छत्तीसगढ़ी जनजीवन, लोकसंस्कृति, परंपराओं, सामाजिक संवेदनाओं और आम जनमानस की भावनाओं की झलक दिखाई देती है। उनकी रचनाएं अपनी माटी, बोली और संस्कृति के प्रति आत्मीयता को शब्द देती हैं।
इस महत्वपूर्ण काव्य संग्रह का संकलन एवं संयोजन श्री विष्णु प्रसाद ताम्रकार जी द्वारा किया गया है। उन्होंने स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी की रचनाओं को एकत्रित कर उन्हें पुस्तक का स्वरूप देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह प्रयास केवल साहित्यिक सामग्री को संजोने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक रचनाकार की स्मृतियों, विचारों और सांस्कृतिक चेतना को संरक्षित करने का सार्थक माध्यम भी है।
छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा के रूप में स्थापित करने और उसकी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच ‘कलम के नांगर’ जैसे संग्रह स्थानीय साहित्यकारों की रचनात्मक विरासत को पहचान देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऐसी कृतियां नई पीढ़ी को अपनी बोली, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
धमधा की धरती से जुड़े स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी की रचनाओं का इस तरह पुस्तक के रूप में प्रकाशित होना पूरे नगर के लिए सम्मान और गौरव की अनुभूति है। यह उपलब्धि धमधा की साहित्यिक पहचान को भी एक नई दृष्टि से सामने लाती है।
88 कविताएं, एक संवेदनशील कलम और छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ी अनगिनत भावनाएं—‘कलम के नांगर’ निश्चित रूप से स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी की साहित्यिक स्मृति को जीवंत रखने वाली महत्वपूर्ण कृति है।


स्वर्गीय बंगाली प्रसाद ताम्रकार जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री विष्णु प्रसाद ताम्रकार जी को इस महत्वपूर्ण साहित्यिक संकलन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।


