

दुर्ग| छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सोमवार को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। जिले के तीनों विकासखंड – दुर्ग, धमधा और पाटन — के सरपंच पहली बार इतने बड़े स्तर पर एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। जिला सरपंच संघ के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में 250 से अधिक सरपंच शामिल हुए, जिन्होंने जनपद पंचायत दुर्ग से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर शासन और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने “सरपंच एकता जिंदाबाद”, “ग्राम पंचायतो को अधिकार दो” और “हमारी मांगे पूरी करो” जैसे नारों से पूरे शहर का माहौल गूंजा दिया। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से कलेक्टर को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौपा गया। सरपंच संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा तथा अनशन और व्यापक शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।
304 में से 250 से अधिक सरपंच में शामिल – जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले के तीनों ब्लाकों में कुल 304 सरपंच है जिनमें से 250 से अधिक सरपंच इस आंदोलन में शामिल हुए। सुबह से ही जनपद पंचायत दुर्ग परिसर में सरपंचों का जुटना शुरू हो गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में सभी सरपंच पैदल रैली निकलते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
सरपंच संघ का कहना है कि लंबे समय से पंचायतो से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित है, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद शासन स्तर पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

17 सूत्रीय मांगों में पंचायतो को अधिक अधिकार देने पर जोर – जिला सरपंच संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पंचायतो के अधिकार, विकास कार्यों, मानदेय, पेंशन और वित्तीय स्वायत्तता से जुड़े कुल 17 बिंदु शामिल किए गए हैं। संघ का कहना है कि यदि इन मांगों को लागू किया जाता है तो ग्राम पंचायते अधिक प्रभावी ढंग से विकास कार्य कर सकेगी और ग्रामीणों को योजनाओं का बेहतर लाभ मिलेगा।
प्रमुख मांग इस प्रकार हैं –
- आवास एवं पेंशन व्यवस्था में सुधार – प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 में पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़े जाएं, आवास सहायता राशि ₹ 2.50 लाख की जाए तथा पेंशन का चयन वर्ष 2011 की सूची के बजाय ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर किया जाए।
- ठेकेदारी प्रथा समाप्त हो – ₹50 लाख तक के सभी विकास कार्यों की कार्य एजेंसी ग्राम पंचायतो को बनाया जाए तथा बाहरी ठेकेदारी व्यवस्था पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- मानदेय और पेंशन वृद्धि – सरपंचों का मासिक मानदेय ₹ 20,000, उपसरपंचों का ₹5,000 और पंचों का ₹ 2,000 किया जाए। साथ ही 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले सरपंचों को ₹5,000 प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाए।
- वित्त आयोग की राशि सीधे पंचायत को मिले – 15वे और 16वे वित्त आयोग की राशि में जिला और जनपद स्तर पर होने वाली 10-10 प्रतिशत कटौती समाप्त कर पूरी राशि सीधे ग्राम पंचायतो के खातों में भेजी जाए। साथ ही प्रत्येक सरपंच को ₹3 लाख की वार्षिक सरपंच निधि उपलब्ध कराई जाए।
- धारा 40 और अविश्वास प्रस्ताव में संशोधन – ग्राम सभा के प्रस्तावों के आधार पर किए गए कार्यों में धारा 40 के तहत कार्यवाई की प्रक्रिया में संशोधन किया जाए तथा अविश्वास प्रस्ताव संबंधी नियमों में बदलाव किया जाए।
- अन्य प्रमुख मांगे – गोठान की शेष राशि का पंचायत में उपयोग, जेम पोर्टल की अनिवार्यता समाप्त कर स्थानीय व्यवसायीयो को प्राथमिकता, जाति एवं निवास प्रमाण – पत्र की प्रक्रिया सरल बनाना तथा पंचायत और राजस्व कर्मचारियों के लंबित भुगतान शीघ्र जारी करना।
30 दिन का अल्टीमेटम फिर होगा बड़ा आंदोलन- जिला सरपंच संघ ने ज्ञापन में साफ कहा है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी 17 सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो सरपंच अनिश्चितकालीन अनशन, धरना और बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। संघ ने यह भी इस्पष्ट किया है कि आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ग्राम पंचायत की मजबूती की मांग – सरपंचों का कहना है कि पंचायते ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, लेकिन अधिकारों और संसाधनों की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि कई योजनाओं में पंचायत की भूमिका सीमित हो जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ रही है। इसलिए पंचायतो को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
अब शासन के फैसले पार्टी की निगाहें – दुर्ग जिले में पहली बार हुए इस बड़े प्रदर्शन ने पंचायत व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बड़ी संख्या में सरपंचों की एकजुटता यह संकेत दे रही है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। अब सभी की निगाहें शासन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि सरपंच संघ की 17 सूत्रीय मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।



