

घटनास्थल पर ही हो सकेगी वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा।
दुर्ग पुलिस के बेड़े में शामिल हुई आधुनिक तकनीक

दुर्ग/भिलाई: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अपराध अनुसंधान (Crime Investigation) और अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में शनिवार को एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई। क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (Regional Forensic Science Laboratory), दुर्ग में अत्याधुनिक ‘मोबाइल फॉरेंसिक वैन’ (Mobile Forensic Van) सेवा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस हाईटेक वैन के आने से अब जिले में वैज्ञानिक अनुसंधान को एक नई और तेज गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि प्रदेश के माननीय स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव और माननीय सांसद श्री विजय बघेल ने इस अत्याधुनिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
क्यों खास है यह ‘चलती-फिरती’ फॉरेंसिक लैब?
अक्सर देखा जाता है कि किसी बड़ी वारदात के बाद घटनास्थल (Crime Scene) से सबूतों को कलेक्ट करने और उन्हें लैब तक भेजने में काफी समय लग जाता है, जिससे कई बार अहम साक्ष्य नष्ट होने का खतरा रहता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन किसी आधुनिक लैब से कम नहीं है। इसके मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
- स्पॉट टेस्ट और त्वरित जांच: इस वैन के माध्यम से फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण (Preliminary Spot Test) कर सकेंगे।
- साक्ष्यों की सुरक्षा: वारदात वाली जगह से फिंगरप्रिंट्स, ब्लड सैंपल्स, डीएनए साक्ष्य और अन्य तकनीकी सबूतों को बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित संकलित (Collect) किया जा सकेगा।
- पारदर्शिता और स्पीड: इसके जरिए पुलिस की विवेचना (Investigation) अधिक प्रभावी, त्वरित और पारदर्शी बनेगी, जिससे कोर्ट में मामलों को साबित करना आसान होगा।
मंत्री गजेंद्र यादव और सांसद विजय बघेल ने क्या कहा?
इस ऐतिहासिक मौके पर सभा को संबोधित करते हुए कानून मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा:
“आज का युग तकनीक का है। मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर तत्काल वैज्ञानिक परीक्षण मुमकिन हो पाएगा। इससे न केवल अपराधों की गुत्थी जल्दी सुलझेगी, बल्कि हमारी कानून व्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी। यह आधुनिक अपराध अनुसंधान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।”
वहीं, सांसद श्री विजय बघेल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह वैन पुलिस विभाग और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच एक मजबूत सेतु (Bridge) का काम करेगी। उन्होंने कहा, “न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता सबसे ऊपर होती है। यह वैन हमारी न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगी।”
‘अपराधों की बदलती प्रकृति के बीच तकनीक जरूरी’
दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री अभिषेक शांडिल्य ने वैन की तकनीकी खूबियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह वैन हर उस आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण से सुसज्जित है जिसकी जरूरत एक पेचीदा क्राइम सीन पर पड़ती है।
वहीं, क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार ने कहा:
“आजकल अपराधियों के तौर-तरीके और अपराध की प्रकृति बेहद जटिल हो चुकी है। ऐसे समय में ट्रेडिशनल पुलिसिंग के साथ-साथ फॉरेंसिक साइंस की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। यह वैन हमारे एक्सपर्ट्स को घटनास्थल पर ही तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी।”वीआईपी और प्रशासनिक अमले की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस गौरवशाली पल का गवाह बनने के लिए जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर, भिलाई नगर विधायक श्री देवेन्द्र यादव, खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय विशेष रूप से उपस्थित थे।
प्रशासनिक मोर्चे पर दुर्ग संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक (SP) श्री विजय अग्रवाल, अपर सत्र न्यायाधीश श्री दीपक खोसले सहित पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रज्ञा गजेंद्र एवं वैज्ञानिक अधिकारी शत्रुघ्न सिंह श्याम द्वारा किया गया।
