धमधा में करंट का कहर: विद्युत पोल के स्टे तार में दौड़ रहे करंट की चपेट में आई गर्भवती भैंस, मौके पर मौत


परसुली गांव में दर्दनाक हादसा, पशु मालिक ने बिजली विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप; करीब 40 हजार रुपए का बताया जा रहा है नुकसान

धमधा| धमधा ब्लाक के ग्राम परसुली में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां विद्युत पोल के स्टे तार में कथित रूप से करंट प्रवाहित होने की वजह से एक गर्भवती भैंस करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना 9 अगस्त को दोपहर करीब 3:00 बजे की बताई जा रही है।
मृत भैंस ग्राम परसुली निवासी बल्लू राम यादव की बताई जा रही है। पशु मालिक के अनुसार भैंस रोजाना की तरह गांव के आसपास घास चरने के लिए गई थी। इसी दौरान वह विद्युत पोल के स्टे तार के संपर्क में आ गई। तार में करंट होने के कारण भैंस उससे चिपक गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
गर्भवती थी भैंस, हादसे के बाद सामने आया दर्दनाक दृश्य – पशु मालिक के अनुसार जीस भैंस की करंट लगने से मौत हुई, वह गर्भवती थी। हादसे के बाद मृत भैंस के शरीर से उसके गर्भस्थ बछड़े का सिर बाहर दिखाई दे रहा था। मौके का यह दृश्य बेहद पीड़ादायक था और घटना की गंभीरता को और बढ़ता है।
एक ओर पशु मालिक ने अपनी करीब ₹40000 कीमत की भैंस खो दी, वहीं दूसरी ओर गर्भस्थ बछड़े की भी मौत हो गई। पशुपालन पर निर्भर परिवार के लिए इस तरह का नुकसान आर्थिक रूप से काफी बड़ा माना जा रहा है।
विद्युत विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल – इस घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत पोल और स्टे तारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामान्य तौर पर विद्युत पोल को सहारा देने के लिए लगाए गए स्टे तारो की स्थिति सुरक्षित रहना जरूरी है। यदि किसी कारण से ऐसे तार में विद्युत प्रभाव हो जाए और वह जमीन अथवा लोगों व पशुओं के संपर्क में आने की स्थिति में हो, तो यह गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि स्टे तार करंट प्रवाहित हो रहा था, तो क्या विद्युत विभाग द्वारा संबंधित पोल और लाइन की नियमित जांच की गई थी? क्या अर्थिंग एवं सुरक्षा व्यवस्था ठीक थी? क्या क्षेत्र में लगे विद्युत पोल और स्टे तारो की समय-समय पर जांच की जाती है?
हालांकि, स्टे तार में करंट आने का वास्तविक कारण क्या था और विद्युत व्यवस्था में किस स्तर पर खामी थी, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पशु मालिक को करीब ₹40000 का नुकसान – बल्लू राम यादव के अनुसार मृत भैंस की कीमत लगभग ₹40000 थी। भैंस की मौत से उन्हें सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीण परिवारों के लिए पशुधन केवल एक पशु नहीं बल्कि आय और परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन होता है।
ऐसे में ग्रामीणों ने मांग किया कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि विद्युत विभाग की लापरवाही सामने आती है तो पशु मालिक को नियम अनुसार उचित मुआवजा दिलाया जाए।
क्या टल सकता था हादसा? – घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विद्युत पोल के स्टे तार में वास्तव में करंट प्रवाहित हो रहा था, तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के पोल और तारों की नियमित जांच तथा रखरखाव बेहद जरूरी है, क्योंकि खेतो और गांवों के आसपास पशु अक्सर खुले में चरते हैं।
ऐसी स्थिति में विद्युत पोल का कोई भी हिस्सा यदि करंट प्रवाहित करने लगे तो पशुओं के साथ-साथ ग्रामीणों की जान के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने की जांच और मुआवजा की मांग – हादसे के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि विद्युत विभाग मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाए कि स्टे तार में करंट कैसे पहुंचा। साथ ही क्षेत्र के अन्य विद्युत पोल और स्टे तारो की भी जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा ना हो।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि जांच में विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और पशु मालिक को नियमानुसार आर्थिक सहायता अथवा मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण – इस मामले में विद्युत विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। विभाग द्वारा यदि मौके का निरीक्षण, विद्युत परीक्षण या अन्य तकनीकी जांच की जाती है तो उसे यह पता चल सकेगा कि स्टे तार में करंट आने का कारण क्या था और हादसे के लिए कौन सी तकनीकी स्थिति जिम्मेदार रही।
धमधा टुडे इस मामले में संबंधित विद्युत विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा, ताकि खबर का दूसरा पक्ष भी पाठकों के सामने रखा जा सके।
सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल – परसुली की यह घटना सिर्फ एक पशु की मौत तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करती है। यदि किसी विद्युत पोल का स्टे तार करंट प्रवाहित करने लगे, तो उससे संपर्क में आने वाला कोई भी पशु या व्यक्ति हादसे का शिकार हो सकता है।
इसलिए जरूरी है कि विद्युत विभाग ऐसे सभी स्थानों की जांच करें जहां पोल, स्टे तार या अन्य विद्युत उपकरण ग्रामीणों और पशुओं की नियमित आवाजाही वाले क्षेत्रों में स्थित है।

फिलहाल परसुली में हुई इस दर्दनाक घटना में एक गर्भवती भैंस की जान चली गई है और पशु मालिक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में स्टे तार में करंट आने की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और पशु मालिक को मुआवजा मिल पाता है या नहीं।